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Showing posts with the label Zainul Abedin Kanpuri
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क़िस्मत से गुज़र जाए एक रात मदीने में | आक़ा को सुनाऊँगा फिर नात मदीने में / Qismat Se Guzar Jaye Ek Raat Madine Mein | Aaqa Ko Sunaunga Phir Naat Madine Mein

क़िस्मत से गुज़र जाए एक रात मदीने में आक़ा को सुनाऊँगा फिर ना'त मदीने में पत्थर भी चमकते हैं, सोना भी निकलता है शहरों से भी अच्छे हैं देहात मदीने में अल्लाह रे ताबानी ! शाहों ने क़दम चूमे देखी ये ग़ुलामों की औक़ात मदीने में ऐ बाद-ए-सबा ! तुझ को इतना भी नहीं मा'लूम बटती है नवासों की ख़ैरात मदीने में ऐ मौत ! अभी रुक जा, उस वक़्त चली आना सरकार हों और हम हों एक साथ मदीने में मेहमान-ए-मुहम्मद को ज़हमत अगर होती है आते हैं मदद करने सौ हाथ मदीने में ना'त-ख़्वाँ: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी qismat se guzar jaae ek raat madine me.n aaqa ko sunaaunga phir naa't madine me.n patthar bhi chamakte hai.n, sona bhi nikalta hai shehro.n se bhi achchhe hai.n dehaat madine me.n allah re taabaani ! shaaho.n ne qadam choome dekhi ye Gulaamo.n ki auqaat madine me.n ai baad-e-saba ! tujh ko itna bhi nahi.n maa'loom baT.ti hai nawaaso.n ki KHairaat madine me.n ai maut ! abhi ruk jaa, us waqt chali aana sarkaar ho.n aur ham ho.n ek saath madine me.n mehmaan-e-muhamm...

रात रौशन सुब्ह का मंज़र सुहाना कर दिया / Raat Raushan Subha Ka Manzar Suhana Kar Diya

रात रौशन सुब्ह का मंज़र सुहाना कर दिया नूर वाले ने ज़माना नूर वाला कर दिया या नबी ! हम आप की सूरत बयाँ कैसे करें आप के तल्वों ने जब सूरज को धुँधला कर दिया आप के हाथों को छू कर ख़ाक सोना बन गई आप के क़दमों ने यसरिब को मदीना कर दिया ये भी है तारीख़ क़ुरआँ की तिलावत के तुफ़ैल इक बहन ने भाई के ग़ुस्से को ठंडा कर दिया सूरा-ए-तब्बत-यदा की ज़द में जब आया लहब अपनी क़ुदरत से ख़ुदा ने उस को लूला कर दिया बेवा औरत हो या बेटी या कि हो बच्चे यतीम रहमत-ए-'आलम ने सब का बोझ हल्का कर दिया वाक़ि'आ-ए-कर्बला सुन कर हमें ऐसा लगा जैसे तुम ने मेरे दिल का ज़ख़्म ताज़ा कर दिया कर्बला की जंग में हँस हँस के सब के सामने हुरमला का एक बच्चे ने सफ़ाया कर दिया प्यास पानी से बुझाते हैं सभी इंसाँ मगर हज़रत-ए-'अब्बास ने पानी को प्यासा कर दिया हज़रत-ए-'अब्बास ने दरिया से नज़रें फेर कर ख़ून महँगा कर दिया, पानी को सस्ता कर दिया कर्बला में बोलता था जो बहुत हक़ के ख़िलाफ़ उस की पूरी नस्ल को ज़ैनब ने गूँगा कर दिया ना'त-ख़्वाँ: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरी raat raushan sub.h ka manzar suhaana kar diy...

क्यूँ न काटे मेरे सरकार के चक्कर बादल / Kyun Na Kate Mere Sarkar Ke Chakkar Badal

क्यूँ न काटे मेरे सरकार के चक्कर बादल इक ज़माने से है शैदा-ए-पयम्बर बादल कैसे चलना है फ़लक पर ये है मर्ज़ी उस की उन के दरबार में चलता है सँभल कर बादल धूप सरकार पे आए भी तो कैसे आए नीचे सरकार चलें, साथ में ऊपर बादल बस इसी आस में बैठा हूँ नहाने के लिए शहर-ए-तयबा से अभी आएगा हो कर बादल आज ना'त-ए-शह-ए-कौनैन की महफ़िल है जहाँ आज बरसेगा वहाँ देखना जम कर बादल जब भी तौसीफ़-ए-पयम्बर में ज़बाँ खुलती है दाद देता है मुझे ख़ूब गरज कर बादल रब त'आला की क़सम, हुक्म जो दे देते हुसैन आता ख़ैमे में लिए ज़मज़म-ओ-कौसर बादल कर्बला तेरी ज़मीं अब नहीं बंजर होगी तुझ पे इक साथ ही बरसे हैं बहत्तर बादल ना'त-ख़्वाँ: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरी kyu.n na kaaTe mere sarkaar ke chakkar baadal ik zamaane se hai shaida-e-payambar baadal kaise chalna hai falak par ye hai marzi us ki un ke darbaar me.n chalta hai sambhal kar baadal dhoop sarkaar pe aae bhi to kaise aae neeche sarkaar chale.n, saath me.n upar baadal bas isi aas me.n baiTha hu.n nahaane ke liye shehr-e-tayba se abhi aaega ho k...

या नबी मैं आप का जब से दीवाना हो गया / Ya Nabi Main Aap Ka Jab Se Deewana Ho Gaya

या नबी ! मैं आप का जब से दीवाना हो गया मेरे पीछे बा-ख़ुदा सारा ज़माना हो गया कर लिया जिस दिन से हम ने उन की सुन्नत पर 'अमल जन्नत-उल-फ़िरदौस में मेरा ठिकाना हो गया वो जहन्नम के कभी शो'लों में जल सकता नहीं मेहरबाँ जिस पर मुहम्मद का घराना हो गया वो चमकते ही रहेंगे हश्र तक सारे मकाँ सरवर-ए-कौनैन का जिस घर में आना हो गया खा रहा है जिन का सदक़ा, है उन्हीं से दुश्मनी बंद कर, नज्दी ! तेरा नाटक पुराना हो गया ना'त-ख़्वाँ: ज़ैन-उल-'आबिदीन कानपुरी ya nabi ! mai.n aap ka jab se deewana ho gaya mere peechhe baa-KHuda saara zamaana ho gaya kar liya jis din se ham ne un ki sunnat par 'amal jannat-ul-firdaus me.n mera Thikaana ho gaya wo jahannam ke kabhi sho'lo.n me.n jal sakta nahi.n mehrbaa.n jis par muhammad ka gharaana ho gaya wo chamakte hi rahenge hashr tak saare makaa.n sarwar-e-kaunain ka jis ghar me.n aana ho gaya khaa raha hai jin ka sadqa, hai unhi.n se dushmani band kar, Najdi ! tera naaTak puraana ho gaya Naat-Khwaan: Zainul Abedin...

ख़ुदा की रहमत बरस रही है | हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं / Khuda Ki Rehmat Baras Rahi Hai | Huzoor Tashreef La Rahe Hain

ख़ुदा की रहमत बरस रही है, हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं फ़रिश्ते घर आमिना का जा कर ख़ुद अपने हाथों सजा रहे हैं नबी का बचपन था क्या सलोना कि चाँद था आप का खिलौना कभी खिलौने को तोड़ते हैं, कभी खिलौना बना रहे हैं दुकानें बू-जहल की हैं जितनी, वो एक भी अब नहीं खुलेंगी थे जिस में झूटे ख़ुदा उसी में हुज़ूर ताला लगा रहे हैं बशर बशर उन को कहने वालो ! बशर की कोई मिसाल तो दो वो डूबे सूरज को सम्त-ए-मग़रिब से देखो वापस बुला रहे हैं सबा ने पूछा, ऐ फूल ! तेरा लिबास कितना महक रहा है तो फूल बोला, नबी के तल्वों की हम भी ख़ैरात पा रहे हैं उन्हीं का का'बा, उन्हीं का तयबा, उन्हीं की दुनिया, उन्हीं का 'उक़्बा ये सच है, ज़ैनुल ! उन्हीं का सदक़ा जो आज हम लोग खा रहे हैं शायर: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी ना'त-ख़्वाँ: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी KHuda ki rehmat baras rahi hai huzoor tashreef laa rahe hai.n farishte ghar aamina ka jaa kar KHud apne haatho.n saja rahe hai.n nabi ka bachpan tha kya salona ki chaand tha aap ka khilauna kabhi khilaune ko to.Dte hai.n kabhi khilauna bana rahe hai.n ...

दरिया हुसैन का है समंदर हुसैन का / Dariya Hussain Ka Hai Samandar Hussain Ka

दरिया हुसैन का है, समंदर हुसैन का प्यासों के वास्ते है ये लंगर हुसैन का है आरज़ू वहाँ भी मिले दर हुसैन का जन्नत में बन के जाऊँ मैं नौकर हुसैन का सूरज ने अपने सर को अदब से झुका लिया नेज़े पे जब बलंद हुआ सर हुसैन का सब जानते हैं कितने बहादर हुसैन हैं मौला 'अली के हाथ का ख़ंजर हुसैन हैं राह-ए-ख़ुदा में घर दिया और सर भी दे दिया अब सोचिए कि कितने दिलावर हुसैन हैं कोई यज़ीद कैसे भला सर उठाएगा मौजूद रब के फ़ज़्ल से घर घर हुसैन हैं चौदह सौ साल पहले गया था जो क़ाफ़िला उस क़ाफ़िले के आज भी रहबर हुसैन हैं ज़हरा के घर में लाल-ओ-जवाहिर हैं बेशुमार जो सब से क़ीमती है वो गौहर हुसैन हैं उस का भी हश्र होगा यज़ीदों के साथ साथ जिस ने कहा कि मेरे बराबर हुसैन हैं इब्न-ए-ज़ियाद का तो वहीं दम निकल गया हुर्र ने कहा जो मेरा मुक़द्दर हुसैन हैं ना'त-ख़्वाँ: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरी dariya husain ka hai, samandar husain ka pyaaso.n ke waaste hai ye langar husain ka hai aarzoo waha.n bhi mile dar husain ka jannat me.n ban ke jaau.n mai.n naukar husain ka sooraj ne apne sar ko adab se jhu...

चाहते आप तो ख़ुद दौड़ के आता पानी / Chahte Aap To Khud Daud Ke Aata Pani

चाहते आप तो ख़ुद दौड़ के आता पानी या हुसैन ! आप की ठोकर से निकलता पानी क्या थी औक़ात पिला देता जो दरिया पानी मेरे 'अब्बास ने दरिया को पिलाया पानी एड़ियाँ अपनी ज़मीं पर जो रगड़ते असग़र कर्बला ! तेरे सँभाले न सँभलता पानी आसमाँ ! गर तुझे शब्बीर इशारा करते दिल ये कहता है कि दिन-रात बरसता पानी इतने तर-दस्त थे 'अब्बास के दोनों बाज़ू पड़ गया जिस के भी उस ने नहीं माँगा पानी तुझ पे सौ जान है क़ुर्बान मेरी, ऐ असग़र ! तेरी हिम्मत ने यज़ीदों को पिलाया पानी कौन कहता है कि पानी के थे प्यासे शब्बीर सच तो ये है कि था शब्बीर का प्यासा पानी या 'अली शेर-ए-ख़ुदा ! आप के बेटे शब्बीर हुक्म दे देते तो सूरज भी उगलता पानी ना'त-ख़्वाँ: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरी chaahte aap to KHud dau.D ke aata paani ya husain ! aap ki Thokar se nikalta paani kya thi auqaat pila deta jo dariya paani mere 'abbaas ne dariya ko pilaaya paani e.Diyaa.n apni zamee.n par jo raga.Dte asGar karbala ! tere sambhaale na sambhalta paani aasmaa.n ! gar tujhe shabbir ishaara karte dil ye kehta hai ...

नबी जी आ रहे हैं / Nabi Ji Aa Rahe Hain

जी करता है आँखें बिछाएँ क़दमों में गिर जाएँ नबी जी आ रहे हैं नबी जी आ रहे हैं कलमा पढ़ती आईं हवाएँ कहने लगी फ़ज़ाएँ नबी जी आ रहे हैं नबी जी आ रहे हैं जन्नत ज़मीं पर है आमद नबी की है जहान में चाँद और सितारों ने नूर बिखेरा आसमान में अपनी शु'आ'एँ आज लुटाएँ खोल के दिल की कलाएँ नबी जी आ रहे हैं नबी जी आ रहे हैं आमिना बीबी की गोदी में माह-ए-ताबाँ आएगा दाई हलीमा के घर में वो मेहमाँ बन के जाएगा डालियाँ सब फूलों की झुक कर लेने लगीं बलाएँ नबी जी आ रहे हैं नबी जी आ रहे हैं आग़ोश-ए-'अब्दुल्लाह रौशन हुई है इक हिलाल से क़ुर्बान हो जाएँ कह दे कोई अब ये बिलाल से जल्दी वो का'बे में आएँ आ कर अज़ाँ सुनाएँ नबी जी आ रहे हैं नबी जी आ रहे हैं असहाब-ए-आ'ला का जिस के लिए दिल बे-क़रार था सलमान-ओ-बू-ज़र को जिस का अभी तक इंतिज़ार था उन से भी जा कर ये कह दो दर-ए-नबी पर आएँ नबी जी आ रहे हैं नबी जी आ रहे हैं ना'त-ख़्वाँ: शुऐब रज़ा वारसी ----------------------------------------------- हूर-ओ-मलाइक झूमें गाएँ अदब से पलकें बिछाएँ नबी जी आ रहे हैं नबी जी आ रहे हैं...

तुम्हें हर ख़ुशी भूल जानी पड़ेगी नज़र में मदीना बसा कर तो देखो / Tumhen Har Khushi Bhool Jaani Padegi Nazar Mein Madina Basa Kar To Dekho

तुम्हें हर ख़ुशी भूल जानी पड़ेगी नज़र में मदीना बसा कर तो देखो ज़माना तुम्हारी ग़ुलामी करेगा नबी की ग़ुलामी में आ कर तो देखो तुम्हें ज़िंदगी भूल जानी पड़ेगी नज़र में मदीना बसा कर तो देखो ज़माना तुम्हारे क़दम चूम लेगा नबी की ग़ुलामी में आ कर तो देखो छुपा लेगी दामन में रहमत ख़ुदा की दयार-ए-शह-ए-दीं में जा कर तो देखो फ़रिश्ते करेंगे तुम्हारी ज़ियारत ग़ुबार-ए-मदीना लगा कर तो देखो कलाम-ए-ख़ुदा का ये ए'लान सुनिए मेरे मुस्तफ़ा का ये फ़रमान सुनिए तुम्हें दोनों 'आलम की दौलत मिलेगी यतीमों को दिल से लगा कर तो देखो वो मेहराब-ओ-मिंबर, वो जन्नत की क्यारी वो पुर-नूर रौज़ा, सुनहरी वो जाली नहीं भूल पाओगे जन्नत में भी तुम मदीने में इक बार जा कर तो देखो रसूलों के हैं जो इमाम उन पे भेजो दुरूद उन पे भेजो, सलाम उन पे भेजो हर इक ग़म से तुम को रिहाई मिलेगी ये नुस्ख़ा ज़रा आज़मा कर तो देखो ना'त-ख़्वाँ: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरी tumhe.n har KHushi bhool jaani pa.Degi nazar me.n madina basa kar to dekho zamaana tumhaari Gulaami karega nabi ki Gulaami me.n aa kar to dekho tumhe.n zindagi ...

आप शम्सुद्दुहा आप बदरुद्दुजा नाम ऐसा सुहाना किसी का नहीं / Aap Shamsudduha Aap Badrudduja Naam Aisa Suhana Kisi Ka Nahin

आप शम्सुद्दुहा, आप बदरुद्दुजा नाम ऐसा सुहाना किसी का नहीं का'बे की छाँव है, नूर का गाँव है ऐसा प्यारा घराना किसी का नहीं जब कि आदम न थे, उन का पुतला न था और फ़रिश्तों ने भी ऐसा सोचा न था राज़-ए-हुस्न-ए-नबी पर था पर्दा पड़ा या'नी अल्लाह ने कुछ बताया न था 'अर्श पर आप का नूर था जल्वा-गर नाम इतना पुराना किसी का नहीं ज़िक्र-ए-'ईसा भी है, ज़िक्र-ए-मूसा भी है नूह भी आए हैं, शीश भी आए हैं और नबियों के भी तज़्किरे हैं यहाँ परचम-ए-नूर इन के भी लहराए हैं देखिये मर्तबा, मुस्तफ़ा के सिवा 'अर्श पर आना-जाना किसी का नहीं रेत की आग पर तन जलाया गया फिर भी छूटा नहीं दामन-ए-मुस्तफ़ा कोई शिकवा-शिकायत न कोई गिला ग़म मिला जो भी दुनिया में वो सह लिया जैसे नाम-ए-बिलाल और 'इश्क़-ए-नबी ऐसा कोई दीवाना किसी का नहीं नूर ही नूर है मय-कदा आप का सब से मशहूर है मय-कदा आप का रौशनी से भरे हैं पियाले सभी जल्वा-ए-तूर है मय-कदा आप का आब-ए-ज़मज़म भी है, जाम-ए-कौसर भी है ऐसा पीना पिलाना किसी का नहीं ना'त-ख़्वाँ: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरी aap shamsudduha, aap badrudduja ...

जिस शख़्स का सरकार पे ईमान नहीं है / Jis Shakhs Ka Sarkaar Pe Imaan Nahin Hai

जिस शख़्स का सरकार पे ईमान नहीं है काबे में रहे फिर भी मुसलमान नहीं है साँसें भी वहाँ लेना बड़े होशो-अदब से वो शहरे नबी है कोई जापान नहीं है जो देख के पहचाने ना सरकार का गुम्बद उस शख़्स की अपनी कोई पहचान नहीं है सरकार के आशिक़ ही सुना करते हैं नातें हर शख़्स सुने नात, ये आसान नहीं है उसको थी पता क्या है शहादत की बुलंदी छे माह का असग़र कोई नादान नहीं है नातख्वां: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी

मेरी गवाही, मेरी शहादत मदीने वाले के हाथ में है / Meri Gawahi, Meri Shahadat Madine Wale Ke Haath Mein Hai

मेरी गवाही, मेरी शहादत मदीने वाले के हाथ में है मेरी नमाज़ और मेरी जन्नत मदीने वाले के हाथ में है ये इल्मो-फ़ज़्लो-कमालो-हिकमत मदीने वाले के हाथ में है ये सरबुलन्दी, ये शानो-शौकत मदीने वाले के हाथ में है ज़बूरो-तौरेत भी है बरहक़, मगर मुझे इनकी क्या ज़रुरत मेरी किताब और मेरी हिदायत मदीने वाले के हाथ में है दिखा के तहज़ीब के उजाले, मुझे न बहकाए दुनिया वाले मैं जानता हूँ ख़ुदा की रहमत मदीने वाले के हाथ में है ख़ुदा का रहमो-करम है सब पर, वही है दोनों जहां का मालिक मगर बक़ौले रज़ा हुकूमत मदीने वाले के हाथ में है वो राहबर भी, वो पासबां भी, वो इल्म वाले हैं ग़ैब-दां भी ख़ुदा की बख़्शि हर एक नेअमत मदीने वाले के हाथ में है गवाही देता है सेहने-अक़्सा, जो सारे नबियों ने सफ बनाई कहा ये जिब्रील ने इमामत मदीने वाले के हाथ में है हज़ार आएं बलाएं लेकिन, बलाएं कुछ भी न कर सकेंगी बता दो उन से मेरी हिफाज़त मदीने वाले के हाथ में है बहोत हैं महशर की गर्म ख़बरें, मगर मुझे कोई डर नहीं है मुझे यक़ीं है मेरी शफ़ाअत मदीने वाले के हाथ में है ख़ुदा को मालूम है ये आबिद ! किसी से कहने की क्या ज़रुरत ...

या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह (ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी) / Ya Rasoolallah, Ya Rasoolallah (Zainul Aabideen Kaanpuri)

या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह सुन तयबा नगर के महाराजा, फ़रियाद मोरे इन असुवन की मोरे नैन दुखी हैं सुख-दाता, दो भीख इन्हें अब दर्शन की जब तोरी डगर मैं पाउँगा, तोरे सपनों में खो जाऊंगा तोरा रूप रचूंगा नैनन में, सुख छैयां में बैठ खजूरन की तोरे रूप की ज्योत से तो जग में क्या जल जल जल उजियारो है तोरे केश बदरवा रेहमत के, क्या रचना रचूं तोरे नैनन की जब रुत हो सुहानी सावन की, तब मुझ को बुलाओ मोरे प्यारे नबी! बागन में तोरे जुल्वा जूलूं, मैं बन के सहेली हूरन की मिल जाए अगर दरबार तेरो, पलकन से बुहारूं द्वार तेरो मैं मुख से मलूँ, नैनन में रचूं, जो धुल मिले तोरे आँगन की या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह, या रसूलल्लाह उठा दो पर्दा, दिखा दो चेहरा, कि नूरे बारी ह़िजाब में है ज़माना तारीक हो रहा है कि मेह्‌र कब से निक़ाब में है खड़े हैं मुन्कर नकीर सर पर. न कोई ह़ामी न कोई यावर ! बता दो आ कर मेरे पयम्बर कि सख़्त मुश्किल जवाब में है ख़ुदा-ए-क़ह्हार है ग़ज़ब पर, खुले हैं बदकारियों के दफ़्तर बचा लो आ कर शफ़ीए़ मह़शर, तुम्हारा बन्दा अ़ज़ाब में है या रस...